Wednesday, May 29, 2019

然而就在此刻,在幾千公里之外的加拿大

然而就在此刻,在幾千公里之外的加拿大,一個女人被捕,給美中的和解當頭澆上一瓢冷水。
華為首席財務運營官,任正非的長女孟晚舟在溫哥華機場轉機時被拘捕。
加拿大應美國要求逮捕孟晚舟。美國說,孟晚舟破壞了針對伊朗的制裁。
談到這裏,任正非明顯很動感情地說,「她被逮捕,作爲父親,我的心都碎了。我怎麽能眼看著孩子吃那麽大的苦?」但他還説,「不經磨難不能成才......既來之則安之。已經發生了這個事情,就安安心心去走法律道路解決這個問題吧。」
不過,華為的麻煩才剛剛開始。將近兩個月之後,美國司法部對華為和孟晚舟提出兩項控罪。
第一項,華爲和孟晚舟被指在與伊朗商業往來問題上誤導銀行和美國政府。
第二項是針對華爲。華爲被指涉嫌刑事犯罪,妨礙司法、試圖盜竊商業機密。
華爲和孟晚舟都否認指控。
有關盜竊商業機密的指控,核心是T-Mobile公司的測試機器人Tappy。Tappy可模擬人指快速觸摸手機屏幕,測試反應程度。
法律文件顯示,華為試圖買進Tappy,當時華爲和T-Mobile仍有合作關係。但是,T-Mobile擔心華為可能使用該項測試技術為競爭對手製造手機,因此拒絕了華為的收購提議。
指控顯示,華為一位美國雇員把Tappy手臂裝入書包偷偷帶走,以便把更多資料傳送給中國的同事。
事件曝光後,華為雇員說,Tappy手臂「錯誤」地掉進自己書包。華為說,那位雇員是個人行事,案件2014年已庭外解決。
但是,最新訴訟的基礎是在中國的經理和在美國的雇員之間的電郵往來,這將華為的管理層和手臂失竊聯係起來。
美國的指控還詳細列舉了華為2013年的獎勵機制:竊取競爭對手秘密信息可獲得獎金。
華為否認有這種機制。
第五代移動互聯網技術(5G)的誕生把美國的擔憂推到最前沿。5G下載速度可能比現在要提高10至20倍,各種終端間的連接也將更便捷。
作爲全球最大的電信基礎設備生產商,華爲成爲打造5G網絡的 領頭羊。但是,美國警告情報盟友,把合同授予華爲,無異於給中國間諜開
去年,澳大利亞先行一步,禁止使用「可能受制於外國政府法外指令」供應商提供的設備。雖沒有點名華為,但是,澳大利亞戰略政策研究所的凱弗(Danielle Cave)說,華為和(中國)政府的關係可能給(澳大利亞)國家安全帶來風險。
她說,據中國法律有關條款,中國公司無法拒絕幫助中共蒐集情報。
凱弗還說,「固然,這場爭論中仍然缺乏確鑿證據。」
「對於用華為手機的普通人來説,這不是大問題。但是,必須保衛國家安全的西方政府為何非要允許一個在中國政治制度下運作的公司進入呢?」
任正非說,華為「從來沒有」、「今後也永遠不會」替中國政府作間諜。他說:「中國政府表態了,不會讓企業安裝後門;我個人也承諾了,我們企業也承諾了不會有後門,三十年的歷史也證明我們沒有後門。」所謂「後門」指的是在軟件或電腦系統中留下秘密入口,安裝方可由此進入系統。
任正非堅稱華為不會這樣做。「華爲的銷售收入是几億美金,不會因爲這一點引起全世界客戶和國家反感,否則以後我們就沒有生意了......我不會冒這個險。」
周代琪是華爲的首席道德遵從官,在華爲工作已有25年。
華爲網站顯示,周代琪曾歷任產品經理、多媒體部總工、硬件總監、西安研究所所長等。据信,他同時還擔當另一個角色:華爲黨委書記。
中共黨章要求,正式黨員在三人以上的單位必須建立黨支部。 中國官方稱黨支部是中共在社會基層組織中的「戰鬥堡壘」,擔負「教育、管理、監督」黨員和「組織、宣傳、凝聚、服務」的職責。但是,中國一黨制的批評者說,黨支部使當局有可能操控企業;近年來,這種操控有所升級。長期為中國公司提供公關策略咨詢、人稱「小查」的查格曼(Elliott Zaagman)說,習近平加強了對中國商界的控制。隨著中國企業在海外擴張實力和影響,中共不想失去對他們的控制。
但任正非說,華為黨支部的重要性比西方人想象的要小得多。他說,黨支部的作用是「教育員工」,不參與任何經營決策
在中國,大多數公司總裁都是中共黨員。他們當中許多人都會定期和來自全國各地的各級黨、政負責人一起參加人大會議。
重大經濟決策就是在此類會議上投票、通過。但是議案可能已經提前獲得首肯。
盡管如此,總裁們還是要來參會,顯示對黨的忠誠,給草案提意見或建議,幫助政府理解商界的擔憂。
入黨,也是構建關係網的好機會。
「小查」認爲,這樣的體制需要忠誠來維持。他說,「黨、政不分,」「中國的體制讓華為這樣的公司缺乏透明度。
外界擔憂,關係緊密意味著,如果中共要求企業做事,企業必須服從,別無選擇。
如果那個企業的業務恰好是敏感的全球電訊基礎設施項目,不難看出西方觀察人士為何會擔心。
沒有證據表明華為聽從中國政府的指令,或者北京有計劃欽定華為的商業計劃或者戰略決策,特別是在蒐集情報方面。
不過,中共如此堅決地捍衛華為,引發出一個問題:華為到底在多大程度上獨立于中共的影響。
比如,北京堅稱,孟晚舟被捕是侵犯人權。
孟晚舟引渡美國案件進展期間,中國逮捕兩名加拿大公民,指控他們盜竊國家機密。批評人士說,這與孟晚舟案有關聯。
正非對加拿大人在華被捕不予置評,但是他說,中國支持華為是可以理解的。
任正非說,保護公民是中國政府的職責,「如果美國的企圖是通過消滅中國最優秀的高科技人才從而獲得競爭優勢,中國政府保護自己的高科技企業成長是有利於中國經濟發展的,政府的保護也是可以理解的。」
過去幾年,有跡象表明,中國政府加大努力,推動私營企業、特別是科技公司,即使在他們堅決抵制的情況下進一步服從黨的領導。
滴滴出行遭遇的麻煩就是一例,凸顯中國公司面對政府壓力試圖保持獨立的艱難。
中國對數據收集、數據隱私的態度和西方不同,許多人並不在乎公司獲取數據,他們可能會說,這會讓工作、生活更方便。
滴滴發生兩起司機殺死乘客的事件後,管理部門據此施壓,要求滴滴開放公司數據。這種做法在中國並不罕見,但是,滴滴以顧客隱私為由拒絕要求
根據中國法律,公司只能從命,別無選擇。後來,滴滴似乎是「從命」了:不過,只是送來了兩大箱打印出來的數據清單「供政府查驗」。戰略國際問題研究所(CSIS)的賽克斯(Samm Sacks)說,這件事表明,中國政府獲取數據並不像許多人想象的那樣是隨心所欲、爲所欲爲的。
她說,圍繞數據,中國政府和公司間可能也存在一場「拉鋸戰」。拉鋸戰的結果將決定外國政府如何看待在海外發展的中囯公司。
像華為這樣的公司,在所處體制内,要生存、壯大,需要和政府保持強大的關係,過去沒有、今後也不會有其他選擇。但是,這種關係可能會傷及他們在海外的聲譽
「小查」認爲,這是兩种不同的體制,「就像......中國插銷插不進西方插座。」

Monday, May 6, 2019

फणी तूफ़ान का क़हर तस्वीरों में

भारत में चल रहे आम चुनाव के नतीजे आने में अब महज 18 दिन रह गए हैं. आधे से ज़्यादा चुनाव बीत चुका है.
भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वापसी को लेकर भारतीय मीडिया में कई सर्वे आ चुके हैं, चुनाव नतीजों के इंतज़ार किए बिना 'आएगा तो मोदी ही' जैसे जुमले खूब प्रचारित हो रहे हैं.
चुनावी सर्वे से लेकर अख़बार और टीवी चैनलों की दुनिया में मोदी के सामने कोई विपक्ष को भाव देता नहीं दिख रहा है, ऐसे समय में पांचवें चरण के चुनाव से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के बस्ती में प्रधानमंत्री मोदी के चुनावी भाषण से विवाद हो गया है.
अपने भाषण में मोदी ने कहा, "आपके पिताजी को आपके राग दरबारियों ने मिस्टर क्लीन बना दिया था. गाजे-बाजे के साथ मिस्टर क्लीन मिस्टर क्लीन चला था. लेकिन देखते ही देखते भ्रष्टाचारी नंबर वन के रूप में उनका जीवनकाल समाप्त हो गया."
कहते हैं कि मोहब्बत और जंग में सब जायज़ है. भारत में होने वाले चुनाव भी अब किसी युद्ध में ही तब्दील होते दिख रहे हैं. कम से कम, नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने चुनाव को युद्ध के मैदान में तो बदल ही दिया है. और जब सब कुछ जायज़ हो....फिर भले ही एक ऐसे शख़्स पर कीचड़ उछाला जाए तो जवाब देने के लिए मौजूद नहीं है. इसके लिए प्रधानमंत्री पद की गरिमा, सवालों के घेरे में आए तो आए.
नरेंद्र मोदी सरकार में भारतीय लोकतंत्र की प्रभावी संस्थाओं की गरिमा को तार-तार करने के उदाहरण हाल के दिनों में बढ़े हैं. चुनाव आयोग की ओर से एक के बाद एक नरेंद्र मोदी को मिली सात क्लीन चिट पर भी विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई, सीवीसी, आईबी और इनकम टैक्स, इन सबका इस्तेमाल विरोधियों के ख़िलाफ़ करने के आरोप भी मौजूदा मोदी सरकार पर लगते रहे हैं.
ऐसे में मोदी के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर दिए ताजा बयान को आरोप-प्रत्यारोप की लगातार टूटती सीमाओं की एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.
नरेंद्र मोदी ने राजीव गांधी को जिस तरह से 'भ्रष्टाचारी नंबर वन' कहा है, वह भी तथ्यों के साथ खिलवाड़ है. रही बात राजीव गांधी को 'मिस्टर क्लीन' के तमगे की तो, ये ठीक वैसी ही बात रही होगी जैसे नरेंद्र मोदी गुजरात में 'विकास पुरुष' के तौर पर प्रचारित होते गए.
लेकिन उन्होंने जिस बोफोर्स कांड का आरोप प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर लगाया है, उसकी जांच में क्या कुछ सामने आया है, इसे देखने की ज़रूरत है. 64 करोड़ रुपए की कथित रिश्वत के इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में राजीव गांधी पर कोई आरोप साबित नहीं हो पाया.
इसे इस लिहाज़ से भी देखा जाना चाहिए कि जब 20 मई, 1991 को राजीव गांधी की मौत हुई थी, उस वक्त उन पर बोफ़ोर्स मामले का आरोप लगाने वाले लोग ही सरकार में थे.
लेकिन उस मध्यावधि चुनाव में उनकी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी, उनकी मौत नहीं हुई होती तो इसमें संदेह नहीं कि राजीव फिर से प्रधानमंत्री होते.
बहरहाल, उनकी मौत के बाद वीपी सिंह वाले जनता दल मोर्चे के क़रीब तीन और उसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के क़रीब पांच साल के शासन में इस मामले में ऐसा कुछ साबित नहीं हो पाया जिससे राजीव गांधी को 'भ्रष्टाचारी नंबर वन' कहा जाता. दिलचस्प यह है कि वाजपेयी की सरकार के दौरान ही राजीव गांधी का नाम बोफोर्स की चार्जशीट से हटाया गया था.
राजनीति में परसेप्शन का अहम रोल होता है, राजीव गांधी को इस परसेप्शन की कीमत चुकानी पड़ी, जनता ने उन्हें चुनाव हराया और लंबे तक बोफ़ोर्स का साया उनकी इमेज पर पड़ता रहा.
लेकिन नरेंद्र मोदी के बयान का दूसरा हिस्सा कहीं ज़्यादा निराशा पैदा करने वाला है. वे राजीव गांधी की मौत को उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप के साथ जोड़कर पेश करने की कोशिश की है. राजीव गांधी की हत्या दुनिया के एक सबसे ख़तरनाक चरमपंथी हमले में हुई थी. बाद में भारत सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न (मरणोपरांत) सम्मानित किया था.
पहले इंदिरा गांधी और उसके बाद राजीव गांधी को जिस तरह से चरमपंथी हिंसा की चपेट में जान गंवानी पड़ी, इसकी मिसाल दुनिया के किसी कोने में देखने को नहीं मिली है.
श्रीलंका में शांति सेना भेजने के चलते ही लिट्टे के आत्मघाती दस्ते में राजीव गांधी की मौत हुई थी. कई विश्लेषक मानते हैं कि राजीव गांधी ने तब अगर श्रीलंका में शांति सेना नहीं भेजी होती तो पाकिस्तान के साथ-साथ श्रीलंका भी अमरीका के एक सामरिक केंद्र के तौर पर स्थापित हो चुका होता.

आत्मघाती हमले में हुई थी मौत

नरेंद्र मोदी केवल भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक होते तो भी उनके चुनाव प्रचार में इस तरह के भाषणों को समझा जा सकता था लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने एक पूर्व प्रधानमंत्री की छवि को मलिन करने की कोशिश की है, जिसकी राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है.
राजीव गांधी को अपनी मां की मौत की सहानुभूति का फायदा हुआ था और महज तीन साल के राजनीतिक अनुभव के भीतर उन्हें भारत जैसे विशाल देश की कमान संभालनी पड़ी थी. 1984 के उस चुनाव में कांग्रेस को 415 सीटें मिली थीं. लेकिन राजनीतिक अनुभवहीनता और आस पास बैठे लोगों की सलाहों के चलते शाहबानो प्रकरण और राम मंदिर दरवाजा खुलवाने जैसे मुद्दे भारत के एक बड़े तबके को आजतक प्रभावित कर रहे हैं.

Friday, April 12, 2019

'हम यहां नाइट शिफ़्ट के लिए आए हैं'

सूडानी फ़ोटोग्राफ़र ओला अलशेख़ ने सूडान की राजधानी खार्तूम में सेना मुख्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों की बढ़ती भीड़ को अपने कैमरे में क़ैद किया.
इस तस्वीर में महिला ने अपनी बांह पर लिखा जस्ट फॉल. प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति ओमर अल-बशीर और उनकी सरकार से इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं.
ये प्रदर्शन शनिवार को शुरु हुआ और प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सेना मौजूदा सरकार से अपना समर्थन वापस ले ले. पास के एक पुल पर टंगे इस बैनर में लिखा है आज़ादी, शांति और इंसाफ़.
सोमवार को भी धरनास्थल पर जाने वालों का तांता लगा रहा. इस रास्ते में ईंट पत्थर के अवरोधक लगाए गए थे ताकि राष्ट्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी (एनआईएसएस) के जासूसों की गाड़ियां वहां न पहंच पाएं.
प्रदशनकारियों ने एनआईएसएस और मिलिशिया पर आरोप लगाया कि वे राष्ट्रपति के समर्थन में प्रदर्शन तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जासूसों और मिलिशिया के लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे और गोलियां चलाईं.
इस लड़की के हाथ में जो पोस्टर है उस पर लिखा है हम सब हामिद हैं. शनिवार को गोलीबारी के बीच प्रदर्शनकारियों को बचाने में हामिद नामक एक सिपाही घायल हो गया था.
यहां जुटे प्रदर्शनकारी केवल खार्तूम से ही नहीं आए थे. इस तस्वीर में मौजूद व्यक्ति के टीशर्ट पर लिखा है, प्रदर्शनकारी न्यू हलफ़ा से भी आए हुए हैं, जोकि यहां से 370 किलोमीटर दूर है.
पिछले कुछ महीने में दर्जनों प्रदर्शनकारी मारे गए हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि ये संख्या 50 से अधिक है.
महिला ने जो तस्वीर अपने हाथ में थाम रखी है, वो एक अध्यापक अहमद अल खीर का है और कथित तौर पर हिरासत में पीटे जाने से उनकी मौत हुई थी.
सोमवार तक प्रशासन ने खार्तूम से सैन्य मुख्यालय आने के सारे रास्ते बंद कर दिए, इसलिए लोग पास के एक पुल से आने लगे, जो खर्तूम और उत्तरी बहारी ज़िले को जोड़ता है.
लोग नारे लगा रहे, "हम यहां नाइट शिफ़्ट के लिए आए हुए हैं."
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जबतक उनकी मांगें नहीं मान ली जातीं वो डटे रहेंगे. ऊपर काले बैनर पर सेना को संबोधित करते हुए लिखा है, "हम सड़क पर प्रदर्शन करने उतरे हैं और अब आपकी बारी है. #
बांग्लादेश में ख़ूबसूरत दिखने के दबाव को कैमरे में क़ैद करने वाली 29 साल की हबीबा नवरोज़ कहती हैं, "महिला होने के नाते आम तौर पर ख़ुद को ख़ूबसूरत दिखाने का हम पर दबाव रहता है."
"और ख़ूबसरती हासिल करने के क्रम में हमारा व्यक्तित्व भी छीन लिया जाता है. यहां तक कि हम ख़ुद के लिए अनजान हो जाते हैं और हमारी पहचान गुम हो जाती है."
हबीबा की तस्वीरों में महिलाएं चमक और रंग से भरपूर दिखती हैं लेकिन उनका चेहरा पूरी तरह ढंका है.
ये दिखाता है कि भले बाहर से बेहद ख़ूबसूरत दिखने के लिए उन्होंने काफ़ी मेहनत की है, लेकिन उनका आत्मविश्वास ख़त्म हो चुका है.
हबीबा इस ओर सबका ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं कि दूसरों को ख़ुश रखने के लिए बांग्लादेशी महिलाओं को कितना कुछ समझौता करना पड़ता है.

Tuesday, April 9, 2019

اتهم غيتاتشو تيسيما، والد قائد الطائرة الإثيوبية، بوينغ بإعطاء الأولوية للمنافسة

يستهلك الصينيون كميات هائلة من الملح، وفول الصويا وأنواع الصلصة المالحة الأخرى، التي تشكل جزءا رئيسيا من مطبخ البلاد، بينما يختلف الأمر في اليابان.
ويقول البروفيسور موراي: "اليابان مثيرة جدا للانتباه، لأنك إذا رجعت إلى ما بين 30 إلى 40 عاما إلى الوراء، ستجدهم مثل الصين حاليا، حيث كانوا يستهلكون كميات هائلة من الملح".
ويضيف أن الملح لا يزال مشكلتهم الرئيسية، لكن استهلاكه انخفض بشكل قياسي.
ويتابع: "اليابانيوين لديهم نظام غذائي، يتمتع بمستويات عالية من أشياء عديدة، وقائية ضد أمراض القلب مثل الخضرزات والفواكه".
أما بريطانيا، فتأتي بعد دول مثل فرنسا والدنمارك وبلجيكا.
وتقدر الدراسة أن 14 في المئة من الوفيات في بريطانيا مرتبطة بالنظام الغذائي، بمعدل 127 حالة وفاة بين كل 100 ألف حالة سنويا.
يقول البروفيسور موراي: "جودة النظام الغذائي مهمة بغض النظر عن وزنك".
وينصح موراي الأشخاص، بزيادة ما يتناولونه من الحبوب الكاملة، المكسرات، الفواكه، البذور، الخضروات، وتقليل الملح بقدر المستطاع.
لكن هذا الأمر مكلف ماليا.
وتشير التقديرات إلى أن تناول خمس أنواع، من الفواكه والخضروات يوميا، سوف يستهلك نحو 52 في المئة، من دخل الأسرة في البلدان الأكثر فقرا.
وتقول البروفيسور فوروهي: "هناك حاجة ماسة إلى خيارات صحية أقل تكلفة".
ويتفق الاثنان، موراي وفوروهي، على ضرورة التحول من التركيز على العناصر الغذائية، مثل الدهون والسكر والملح وغيرها، إلى التركيز على الأطعمة الفعلية التي يجب أن يتناولها الناس.
خفضت شركة بوينغ الأمريكية لصناعات الطيران والفضاء إنتاج طرازها الأكثر مبيعا 737 مؤقتا عقب حادثتي سقوط طائرتين من هذا الطراز في إثيوبيا وإندونيسيا.
ويتراجع إنتاج الشركة بعد هذا القرار من 52 طائرة إلى 42 طائرة شهريا اعتبارا من منتصف إبريل/ نيسان الجاري، وفقا لبيان أصدرته بوينغ.
وجاء القرار في محاولة للتعامل مع وقف تسلم طلبات تصنيع الطراز 737 ماكس بعد حادثتي سقوط طائرتي
وتخضع الطائرة لفحص في الوقت الراهن، والذي أشارت نتائجه الأولية إلى أن نظام "مانع التوقف المفاجيء" كان به عطل.
وسقطت رحلة الخطوط الجوية الإثيوبية بعد الإقلاع بدقائق قليلة من مطار أديس أبابا في مارس/ آذار الماضي، مما أسفر عن مقتل 157 شخصا.
وسقطت طائرة من نفس الطراز تابعة لشركة ليون للخطوط الجوية في إندونيسيا في البحر بعد دقائق معدودة من إقلاعها من جاكارتا قبل خمسة أشهر من سقوط الطائرة الإثيوبية. وخلف الحادث 189 قتيلا.
وتشير النتائج الأولية للتحقيق في الحادثين إلى أن قائدي الطائرتين كانا يصارعان من أجل مقاومة نظام مانع التوقف المفاجيء الذي تسبب إلى هبوط الطائرة بمقدمتها.
وأشار تقرير صدر الخميس الماضي إلى أن قائد الرحلة الجوية ET302 التابعة للخطوط الاثيوبية اتبع الإجراءات الموصى بها من قبل الشركة المصنعة للطائرة قبل سقوطها.
قالت بوينغ في بيان أصدره الرئيس التنفيذي للشركة دينيس ميولنبرغ بخصوص الطراز المعيب: "توصلنا إلى أن سقوط الرحلتين الجويتين، الرحلة 610 التابعة لخطوط ليون الجوية والرحلة 302 للخطوط الجوية الإثيوبية، جاء نتيجة سلسلة من الأحداث خاصة بالطائرتين، وهو تفعيل نظام مانع التوقف المفاجيء للمحرك بطريقة خاطئة. ونتحمل مسؤولية القضاء على هذا الخطر، ونعرف جيدا كيف نفعل ذلك."
وشدد البيان على أن بوينغ تحرز تقدما على صعيد تحديث برمجيات نظام مانع التوقف المفاجيء للمحرك علاوة على الانتهاء من التدريب اللازم للطيارين الذين يقودون الطراز ماكس.
وأضاف: "وحيث أننا نتخذ تلك الخطوات، رأينا أنه من المناسب ضبط نظام إنتاج 737 مؤقتا حتى نتمكن من استيعاب توقف تسلم الطلبات المقدمة إلينا للحصول على هذا الطراز، مما يسمح لنا بإعطاء الأولوية لتوفير للموارد الإضافية المطلوبة للتركيز على اعتماد البرمجيات وإعادة ماكس إلى الطيران."
وأكد البيان على أن معدلات التوظيف الحالية في الشركة لن تتأثر بخفض الإنتاج علاوة على إعلان الشركة تشكيل لجنة لمراجعة "السياسات والعمليات الخاصة بتصميم وتطوير الطائرات" التي تصنعها الشركة.
كان سقوط الطائرة بوينغ 737 التي تحمل الرحلة الجوية ET302 التابعة للخطوط الجوية الإثيوبية في العاشر من مارس/ آذار الماضي سببا في قرار اتخذته شركات الخطوط الجوية على مستوى العالم بوقف إقلاع رحلاتها على هذا الطراز.
وكانت إدارة الطيران الفدرالية الأمريكية هي آخر جهة تنظيمية رئيسية تصدر القرار بوقف إقلاع الطراز 737 ماكس، مما أدى إلى مواجهة الإدارة اتهامات بمحاباة بوينغ.
وأثار تأخر الإدارة تساؤلات بشأن سبب تأخر الإدارة الأمريكية للطيران في اتخاذ قرار وقف إقلاع الطائرات المعيبة.
وبعد إصدار بوينغ لهذا البيان، هبطت أسهم الشركة الأمريكية بحوالي 1.00 في المئة ليتم تداولها عند 387.14 دولارا للسهم.ن الطائرات من الخدمة.
وقال غيتاتشو تيسيما، والد قائد إحدى الطائرتين، بي بي سي: "الاعتذار ليس له أي قيمة كما أنه جاء متأخرا للغاية."
وكان لدى ياريد غيتاتشو، 29 سنة، خبرة تجاوزت 8000 ساعة طيران عندما تحطمت الطائرة التي كان يقودها.
وأضاف الأب المكلوم: "أنا فخور جدا بابني وزميله الطيار الآخر".
وتابع: "لقد صارعا حتى اللحظة الأخيرة وفعلا كل ما في وسعهما، لكن لسوء الحظ لم يتمكنا من إنقاذ الطائرة". وقال: "لست نادما لأنه أصبح طيارا، فقد مات شهيدا للواجب."
وألقى تيسيما باللوم على بوينغ، وتساءل "لماذا سمحتم بإقلاعها؟ لأنهم كانوا في منافسة. أرادوا أن يبيعوا أكثر. فحياة إنسان ليس لها قيمة في بعض المجتمعات".
ورفع أقارب الراكبة الأمريكية سامية ستومو، 24 سنة، التي توفيت إثر سقوط الطائرة الإثيوبية أول دعوى قضائية ضد بوينغ الخميس الماضي أمام إحدى محاكم شيكاغو.

Thursday, April 4, 2019

अंत में फ़ियर उन शब्दों को बदलने की सलाह देते हैं

वह कहते हैं, "हममें से जिन लोगों ने अपने शोध-प्रबंध तीन से 13 साल में पूरा करने की जगह एक या दो साल में ही पूरे कर लिए, वे अपनी ज़िंदगी में दूसरों से ज़्यादा व्यस्त थे."
"हम रिश्ते में थे, सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते थे. मैं तो 40-घंटे प्रति सप्ताह की नौकरी भी करता था."
थीसिस लिखने के दौरान वह हर दूसरे वीकेंड पर स्कीईंग के लिए भी जाते थे, क्योंकि "उस साल बहुत बर्फ़ गिरी थी."
दूसरी ओर जो लोग अपनी थीसिस लिखने में जूझ रहे थे, वे बस यही काम कर रहे थे. उनकी ज़िंदगी बस काम ख़त्म करने के लक्ष्य में ही उलझी थी.
फ़ियर कहते हैं, "जो लोग दूसरी गतिविधियों में शामिल थे वे अपना दिन 30 से 60 मिनट पहले शुरू करते थे, कभी-कभी 90 मिनट पहले भी, क्योंकि हमें अपनी ज़िंदगी जीनी थी."
मामला नियंत्रण का है. लंच रद्द कर देने या जिम जाना स्थगित करके किसी एक काम में पूरी तरह लग जाने की जगह आप अपने समय को बांट सकते हैं.
अगर खाली समय और गतिविधियों की पूरी सूची आपके सामने हो तो आपको पता रहेगा कि काम के लिए आपके पास कितना समय है. फिर आपको बस इतना करना है कि शुरुआत करनी है.
बेशक दूसरा हिस्सा पहले से अधिक जटिल है. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि लोग टाल-मटोल क्यों करते हैं.
हम घंटों सोच-विचार में क्यों डूबे रहते हैं, जबकि हम तुरंत शुरुआत कर सकते हैं?
कैलिफोर्निया के ओकलैंड में रहने वाली मनोवैज्ञानिक जेन बुर्का ने साथी मनोवैज्ञानिक लेनोरा युएन के साथ मिलकर एक किताब लिखी है- "Pr ".
इन दोनों मनोवैज्ञानिकों की मुलाकात बर्कले में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट काउंसिल सेंटर में हुई थी.
फ़ियर की तरह ही शिथिलता के मनोविज्ञान में इनकी रुचि छात्रों की मदद करते हुए जगी.
ये दोनों उन्हीं की तरह थे जिनकी इन्होंने मदद की थी. अपनी डॉक्टरेट थीसिस लिखने में इन्होंने भी संघर्ष किया था.
अपने शोध के दौरान इन मनोवैज्ञानिकों ने देखा कि देरी करने वालों में कई चीजें समान होती हैं.
समय के साथ उनका रिश्ता बड़ा ही अस्पष्ट और अवास्तविक होता है. साथ ही, वे ऐसा काम करना चाहते हैं जो अपने आप में संपूर्ण हो, कोई मीन-मेख न निकाल पाए.
अहम कार्यों को टाल देने की आदत की गहरी मनोवैज्ञानिक जड़ें हो सकती हैं.
बुर्का कहती हैं, "शिथिलता को समय का खराब प्रबंधन या आलस्य समझ लिया जाता है, जबकि ऐसा नहीं है."
बुर्का ने महसूस किया कि जो टालमटोल करते हैं उनका आत्म-सम्मान कम होता है.
"अगर आपने अपने सर्वोत्तम प्रयास करने में बहुत लंबा इंतज़ार किया है तो आपके सर्वश्रेष्ठ प्रयासों को आंका नहीं जा सकता."
निराशाजनक परिणाम के लिए शिथिलता को दोष देना आसान है, बजाय इसके कि आप मानें कि आपका सबसे बढ़िया प्रयास भी बहुत बढ़िया नहीं था.
अगर आपने आखिरी क्षणों में अच्छा काम कर लिया तो आप चहक उठेंगे कि आपने नामुमकिन को मुमकिन कर दिया है.
साप्ताहिक योजना बना लेने के बाद बड़े और डराने वाले काम, जैसे टैक्स रिटर्न भरना, से खुद को दूर रखिए.
इसकी जगह सिर्फ़ 15 मिनट के लिए उस काम पर ध्यान दीजिए जो आपके हाथ में है. इतना समय निकालना आसान है. इससे लक्ष्य के प्रति बेचैनी दूर रखने में मदद मिलती है.
बुर्का कहती हैं, "प्रगति धीरे-धीरे होती है, न ही हरक्यूलियन प्रयास से."
फ़ियर को 15-मिनट के नियम वाला विचार तब आया था जब वह फोबिया से पीड़ित मरीजों का इलाज कर रहे थे.
वह कहते हैं, "शिथिलता का इलाज मैंने फोबिया की तरह किया. यह काम से आपका डर है."
"आप जिसे भी ख़तरनाक समझते हैं उससे बचने की कोशिश करते हैं. इससे उबरने के लिए हम टुकड़ों-टुकड़ों में इसका सामना करते हैं."
फ़ियर का कहना है कि मकड़ियों से डर को दूर करने का सबसे सही तरीका यह सोचना है कि मकड़ी आपसे 10 फीट दूर है. भागना इसका तरीका नहीं है.
अब यह माना जाने लगा है कि शिथिल होकर काम बंद कर देना एक मानसिक स्वास्थ्य मुद्दा है.
रिसर्च ने दिखाया है कि काम रोक देने वाले लोगों में अवसाद और बेचैनी की समस्या होने की आशंका अधिक रहती है.
2014 के एक अध्ययन से पता चला था कि  डिसऑर्डर के शिकार छात्र ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते और उनमें शिथिलता होने की आशंका अधिक रहती है.
यह भी कहा जाता है कि अगर मोज़ार्ट आज पैदा हुए होते तो उनके  या टॉरेट सिंड्रोम से पीड़ित होने का पता चलता.
मोज़ार्ट के जीवनी लेखक ने लिखा है कि उनका ध्यान आसानी से भटक जाता था, जबकि उनकी बहन ने एक बार कहा था कि वह किसी "बच्चे की तरह" हैं.
स्पष्ट है कि इस महान संगीतकार को कई समस्याएं रही होंगी जिसके कारण वे आखिरी क्षणों तक काम लटकाकर रखते थे.

Tuesday, April 2, 2019

मायावती को चुनौती देना कितना आसान

सतीश प्रकाश की मानें तो ख़ासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक तौर पर मायावती को चुनौती देना अभी आसान नहीं है. इसकी वजह ये है कि दलित समाज ये मानता है कि दलित हितों के लिए कांशीराम की बनाई हुई परंपरा का निर्वाह मायावती ही कर रही हैं. और जो भी इसका उल्लंघन करने की कोशिश करेगा, दलित समाज उसे ख़ारिज कर देगा.
लेकिन कुछ राजनीतिक विश्लेषक ऐसा नहीं मानते.
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार अमिता वर्मा कहती हैं, "चंद्रशेखर ने जिस चालाकी से अपने राजनीतिक क़दम बढ़ाए हैं, मायावती के लिए उसके मक़सद को पहचानना मुश्किल नहीं है. इसीलिए वो दलित समुदाय को आग़ाह करती रहती हैं. रही बात इसकी
कहते हैं कि नाश्ता राजा की तरह, दोपहर का खाना राजकुमार की तरह और रात का खाना फ़क़ीर की तरह होना चाहिए. मतलब ये कि नाश्ता सबसे भारी-भरकम और रात का खाना बेहद हल्का-फुल्का होना चाहिए.
जब युवा यूनिवर्सिटी में दाख़िला लेते हैं, तो आम तौर पर उनका वज़न बढ़ जाता है. अमरीका में तो इसके लिए ख़ास शब्द गढ़ लिया गया है- फ्रेशमैन 15. माना जाता है कि यूनिवर्सिटी में पहले साल छात्रों का वज़न 15 पाउंड तक बढ़ जाता है.
इसकी एक वजह तो ये भी होती है कि छात्रों को घर का खाना नहीं मिलता. फिर उनकी उछल-कूद भी घर के मुक़ाबले कम हो जाती है.
वैसे, अब वैज्ञानिक युवाओं के वज़न बढ़ने की एक और वजह गिनाने लगे हैं. वो ये है कि छात्राओं के खान-पान का वक़्त यूनिवर्सिटी आते ही बदल जाता है. वो देर रात तक जगते हैं. खाना देर से खाते हैं. बेवक़्त सोते हैं. पार्टी करते हैं. शराब पीते हैं. इससे युवाओं की बॉडी क्लॉक बहुत डिस्टर्ब हो जाती है.
कई दशकों से हमें बताया जाता रहा है कि वज़न बढ़ने से हमें टाइप-2 डायबिटीज़, दिल की बीमारियां और दूसरी लाइफस्टाइल बीमारियां हो जाती हैं. इसके पीछे खाने की क्वालिटी तो एक वजह होती ही है. साथ ही वर्ज़िश में कम वक़्त लगाना और कम कैलोरी बर्न करना भी कारण बन जाते हैं.
लेकिन, तमाम नई रिसर्च से ये पता चल रहा है कि खान-पान का वक़्त भी मोटापा बढ़ाने और घटाने में अहम रोल निभाता है.
यानी आप क्या खाते हैं, ये तो अहम है ही. आप कब खाते हैं, ये भी बहुत महत्वपूर्ण है.
प्राचीन सभ्यताओं में भी खाने के वक़्त पर बहुत ज़ोर दिया जाता था. हिंदुस्तान में दिन में ज़्यादा खाने और रात में कम खाने पर ज़ोर था. प्राचीन चीन में सुबह 7 बजे से 9 बजे तक भारी नाश्ता और उसी हिसाब से दिन के अलग-अलग वक़्त में अलग ख़ुराक बतायी गई थी. चीन के विद्वान लोग भी रात के खाने को हल्का ही रखने की सलाह देते थे.
इस प्राचीन ज्ञान की वैज्ञानिक वजह भी है.
जो लोग डाइटिंग करते हैं, उनके खान-पान में ज़ोर कम से कम कैलोरी लेने पर होता है. पर, वो खाना कब खाएं, इस पर भी ज़ोर देने की ज़रूरत है.
एक रिसर्च में जब कुछ मोटी महिलाओं को दिन में ही खाने को कहा गया. वहीं कुछ और महिलाओं को कभी भी खाने की आज़ादी दी गई. तो, देखा गया कि जिन महिलाओं ने दिन में ही ज़्यादा कैलोरी ली, उन्हें वज़न घटाने में आसानी हुई. वहीं, देर रात तक खाने की आज़ादी वाली महिलाओं का वज़न कम घटा.
ब्रिटेन की सरे यूनिवर्सिटी के जोनाथन जॉन्सटन कहते हैं कि, 'लोग सोचते हैं कि जब हम सोते हैं, तो शरीर के भीतर गतिविधियां भी बंद हो जाती हैं. लेकिन ये हक़ीक़त नहीं है.'
जब हम सुबह कुछ खाते हैं, तो उसे पचाने में ज़्यादा कैलोरी ख़र्च होती है. पर, दिन में या देर रात खाने पर उसे पचाने में कम कैलोरी ख़र्च होती है.
दूसरी बात ये है कि जब हम देर रात तक खाना खाते हैं, तो हमारे शरीर को फैट पचाने का वक़्त नहीं मिल पाता. पेट भरा रहता है, तो शरीर को फैट जलाने की ज़रूरत नहीं होती. क्योंकि शरीर की फैट तभी इस्तेमाल होती है, जब हमें कुछ खाने को नहीं मिलता.
कि वो दलित वोटों को कितना प्रभावित कर सकता है तो अब स्थितियां बदल चुकी हैं."
"दलितों में भी युवा मतदाता बड़ी संख्या में हैं, सोशल मीडिया में सक्रिय हैं, वो चंद्रशेखर और मायावती की तुलना भी करते हैं. इसलिए वो आंख-मूंद कर किसी पर यक़ीन कर लेंगे, ये मुश्किल है. ऐसी स्थिति में ये कहना कि चंद्रशेखर के पास दलित मतों के बिखराव की ताक़त नहीं है, सही नहीं लगता."
बहरहाल, चंद्रशेखर ने वाराणसी से न सिर्फ़ चुनाव लड़ने की घोषणा की है बल्कि विपक्षी दलों से समर्थन भी मांगा है.
ऐसे में ये सवाल भी काफ़ी अहम है कि यदि बीएसपी और दूसरे विपक्षी दल वाराणसी में बीजेपी उम्मीदवार प्रधानमंत्री मोदी की हार चाहते हैं तो क्या वो चंद्रशेखर को समर्थन देंगे.

Thursday, February 7, 2019

बर्फ़ की चादर में लिपटे नायाग्रा फ़ॉल्स की मनमोहक तस्वीरें

बीते साल दुनियाभर के लाखों फ़ुटबॉल फ़ैंस विश्व कप देखने रूस पहुंचे. ये फोटो पत्रकार पीटर डेंच के लिए भी इस विशाल देश को देखने का एक मौका था. उन्होंने ट्रांस साइबेरियन रेल नेटवर्क में पांच हज़ार मील लंबा सफ़र किया. इन सात दिनों के दौरान वो तस्वीरें खींचते रहे.
पीटर की ये तस्वीरें जल्द ही लंदन में प्रदर्शन की जाएंगी. एक नज़र इस यात्रा के दौरान ली गईं चुनिंदा तस्वीरों पर.